Monday, 13 July 2015

तेरी मुश्किल ना बढाऊंगा , चला जाऊंगा,
अश्क आँखो में छुपाऊंगा, चला जाऊंगा,
अपनी दहलीज पर कुछ देर तो पड़ा रहने दे,
जैसे ही होश में आऊंगा, चला जाऊंगा..!
मुद्दतों बाद आया हूं पुराने घर में,
खुद को जी भरके रूलाऊंगा, चला जाऊंगा...!
इस दुनियां से कुछ भी नही लेना मुझको,
बस तुम्हें देखने आऊंगा, चला जाऊंगा.... !
चंद यादें "राही" को बच्चों की तरह प्यारी है,
उनको सीने से लगाऊंगा, चला जाऊंगा ...!!

दोस्तों दहेज़ हत्या पर कुछ लाइन लिखी है:-
जलने के बाद जब लड़की का पति उससे मिलने हॉस्पिटल आता है तो लड़की के अल्फ़ाज़ कुछ इस तरह थे...... 

की थी जब मुहोब्बत, तूने बतलाया नही,
मेरी दौलत पर तेरा दिल आया है, 

करके शादी ले आया घर अपने,
नज़रे मेरे घर पर गढ़ा आया है, 

देती रहती है ताने तुम्हारी माँ मुझे मायके के,
कहती है मेरा बेटा किसको ब्याह लाया है, 

देने को बैठे थे कई रहिस अपनी लडकिया,
इसके घर से तो नाम भर का दहेज़ आया है, 

मैं कैसे बताऊँ तुझे मेरे घर की हकीकत,
मैं जानती हुँ पापा पगड़ी तक गिरवी रख आया है, 

आज धमकी दी है माँ ने जला देगी वो मुझे,
दुःख बस इतना है की तू भी हामी भर आया है, 

देख नही सकती में दुःख में तुझे और अपने बाबुल को,
इसीलिए मेरे साजन मैंने खुद को जलाया है ...... !!

 >>>>} राही {<<<<